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June 18, 2026 11:33 pm

हौसलों के आगे बौनी साबित हुई आफत की बारिश: तूफान के बीच ‘दीदी कैफे’ की महिलाओं ने टोटो से पहुंचाया 50 लोगों का भोजन।

मूसलाधार बारिश और तूफान भी नहीं रोक पाए जेएसएलपीएस से जुड़ी आजीविका दीदीयों के कदम, समय पर डीडीसी व प्रखंड कार्यालय पहुंचाई खाद्य सामग्री।

पाकुड़: कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो रास्ते की कोई भी बाधा आपको मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पाकुड़ समाहरणालय के बाहर स्थित ‘पलाश आजीविका दीदी कैफे’ का संचालन करने वाली जेएसएलपीएस (JSLPS) की दीदीयों ने। गुरुवार को जिले में हुई भारी बारिश और तेज तूफान के बीच इन महिलाओं ने न केवल अपनी कर्तव्यपरायणता की मिसाल पेश की, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने का जीवंत उदाहरण दिया।

तूफान के बीच टोटो के सहारे समय पर पहुंचाया खाना

कैफे की मुख्य संचालक मधुमिता दीदी ने बताया कि आज दोपहर के भोजन के लिए पाकुड़ डीडीसी कार्यालय एवं पाकुड़ प्रखंड कार्यालय से लगभग 50 लोगों के भोजन का ऑर्डर प्राप्त हुआ था। खाना तैयार ही हुआ था कि अचानक मौसम ने करवट बदली और पाकुड़ में भारी वज्रपात के साथ मूसलाधार बारिश और तेज आंधी शुरू हो गई। ऐसी स्थिति में बाहर निकलना भी दूभर था, लेकिन आजीविका दीदीयों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने भोजन को सुरक्षित तरीके से पैक किया और इस भीषण तूफान के बीच टोटो (ई-रिक्शा) के सहारे दोनों कार्यालयों में समय पर भोजन की डिलीवरी सुनिश्चित की।

अधिकारियों के सहयोग को सराहा

अपनी बात साझा करते हुए मधुमिता दीदी ने जिला प्रशासन के सहयोग की भी सराहना की। उन्होंने कहा, पूर्व के उपायुक्त सर ने हमें रोजगार देकर आगे बढ़ाया था। हमारे डीपीएम सर ने जेएसएलपीएस के माध्यम से हमें इस पलाश आजीविका दीदी कैफे की जिम्मेदारी सौंपी ताकि हम आत्मनिर्भर बन सकें। वर्तमान डीसी मैडम भी बेहद संवेदनशील हैं। हाल ही में उन्होंने खुद हमारे कैफे का दौरा किया और हमारी समस्याओं को सुनकर हमारे किचन और व्यवस्थाओं को और बेहतर व आधुनिक बनाने का आश्वासन दिया है।

घर की चारदीवारी से निकलकर बनीं आत्मनिर्भर

एक समय था जब कैफे में काम करने वाली छोटी, शर्मिला, अंजलि, कर्मी, मरियम और डोलोरेस जैसी दीदीयां सिर्फ घर के कामकाज तक ही सीमित थीं और आर्थिक तंगहाली से जूझ रही थीं। लेकिन आज वे सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक सजगता से कैफे का संचालन करती हैं। दीदीयों का कहना है कि अब समाहरणालय, ब्लॉक, जिला कार्यालय, जेएसएलपीएस के कार्यक्रमों और अस्पताल तक में हमारे हाथ का बना शुद्ध भोजन जाता है। लोग हमारे काम और व्यवहार को बेहद पसंद करते हैं, जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ा है।
विपरीत मौसम में भी दीदीयों द्वारा निभाई गई इस जिम्मेदारी की समाहरणालय और प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों व कर्मियों ने जमकर सराहना की है।

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