डीबीएल कोल माइंस में अवैध व जोखिमपूर्ण ब्लास्टिंग का दावा, बारूद के दस्तावेजों के दुरुपयोग।
पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड अंतर्गत संचालित कोल माइंस में कोयला उत्खनन के दौरान ब्लास्टिंग प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने खदान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और डीजीएमएस (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ माइन्स सेफ्टी) के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने दावा किया है कि खदान में बड़े पैमाने पर की जा रही ब्लास्टिंग प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षा मानकों के विपरीत है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की जान-माल को खतरा बना हुआ है।
लीज, ब्लास्टिंग आदेश और दस्तावेजों की जांच की मांग
सुरेश अग्रवाल ने सवाल उठाया है कि खदान में ब्लास्टिंग किसके आदेश पर और किन शर्तों के तहत की जा रही है। उन्होंने कहा कि लीज इकरारनामे में निर्धारित शर्तों और ब्लास्टिंग संबंधी अनुमति की गहन जांच आवश्यक है। सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि पंचूवाड़ा सेंट्रल कोल माइंस, जिसे वर्तमान में दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (DBL) द्वारा संचालित बताया जा रहा है, वहां खनन कार्य में नियमों की अनदेखी हो रही है।
डीजीएमस सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि कोयला खदानों में ब्लास्टिंग एक अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया है, जिसे डीजीएमएस द्वारा निर्धारित कड़े सुरक्षा मानकों के तहत ही किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि वर्तमान में अमड़ापाड़ा क्षेत्र की खदानों में इन मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे गंभीर दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।
बारूद दस्तावेजों के दुरुपयोग का भी आरोप
सुरेश अग्रवाल ने यह भी दावा किया कि ब्लास्टिंग में उपयोग किए जा रहे बारूद के दस्तावेज पैनम कंपनी के नाम पर हैं, जिनका कथित रूप से गलत इस्तेमाल डीबीएल कोल कंपनी द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय और सुरक्षा अनियमितता बताया है।
उच्च स्तरीय और प्रशासनिक जांच की मांग।
उन्होंने जिला प्रशासन, खनन विभाग और राज्य सरकार से पूरे मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने CBI जांच की अनुशंसा करने की भी बात कही है।
RTI के माध्यम से भूमि और परियोजना विवरण मांगा गया
इस मामले से जुड़े आरटीआई आवेदन में भी कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। आवेदन में मांग की गई है कि:
डीबीएल द्वारा स्थापित पेट्रोल पंपों और भूमि अधिग्रहण का पूरा विवरण
रेलवे साइडिंग परियोजना में अधिग्रहित भूमि का रकवा और खेसरा विवरण
प्रभावित लोगों की संख्या और मुआवजा भुगतान की स्थिति
जिन लोगों को भुगतान नहीं मिला, उसके कारणों की जानकारी
स्थानीय सुरक्षा पर सवाल
आरोपों में यह भी कहा गया है कि ब्लास्टिंग के दौरान मानक प्रक्रिया जैसे सायरन, चेतावनी संकेत और सुरक्षा घेरा ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है, जिससे आसपास के गांवों में खतरे की स्थिति बनी हुई है।
आरोपों पर क्या बोले प्रोजेक्ट हेड
डीबीएल कोल कंपनी के प्रोजेक्ट हेड बृजेश कुमार ने कोल माइंस और बारूद ब्लास्टिंग को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि माइनिंग से जुड़ा हर कार्य केंद्र सरकार की निर्धारित प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाता है। सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन व सरकारी स्वीकृति के बाद ही संचालित होती हैं, जो भी आरोप लगाए जा रहे है बेबुनियाद और निराधार है।





